सीरिया की अरब लीग में वापसी के साथ ही इलाक़े के समीकरण में तेज़ी से बदलाव के साथ ही मीडिल ईस्ट में अमेरिका की नीतियों को गहरा झटका लगा है।
अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने काहिरा में हुई बैठक के बाद सीरिया की अरब लीग में वापसी पर मोहर लगा दी है। अरब लीग के प्रवक्ता ने कहा कि काहिरा में आज हुई बैठक में अरब लीग ने सीरिया की वापसी पर रज़ामंदी ज़ाहिर कर दी है।
मिस्र के विदेश मंत्री सामेह शुक्री ने आतंकवाद के खिलाफ सीरिया के संघर्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ देशों से जुड़े संगठनों को सीरिया में संस्था का रूप दे दिया गया ताकि इन देशों के हितों के मुताबिक़ काम किया जा सके। आतंकवाद के खिलाफ जंग में सीरिया की जनता अकेली थी और उन्होंने बहुत मुसीबत और मुश्किलों का सामना किया है।
वहीँ अरब लीग में सीरिया की वापसी को अमेरिका की करारी हार बताते हुए ब्लूमबर्ग ने कहा कि सीरिया के बारे में अमेरिकी नीतियों को लेकर अरब देशों की बेहिसी और उदासीनता और अरब लीग में दमिश्क़ की पूरे शान और इज़्ज़त के साथ वापसी मगरिबी एशिया में अमेरिका के घटते प्रभाव और उसकी घटती साख बताने के लिए काफी है।
अमेरिका की इस न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि सीरिया की अरब लीग में वापसी का मतलब है कि एक बार फिर ईरान और रूस के मुक़ाबले अमेरिका को मुंह की खाना पड़ी है।
वहीँ 12 साल बाद एक बार फिर अरब लीग में अपने वापसी पर सीरिया के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अरब लीग के संस्थापक सदस्य के रूप में हम अरब सहयोग को मज़बूत बनाने की ज़रूरत पर बल देते हैं। अगले मरहले में अरब देशों को एक दूसरे के सम्मान, आपस में बातचीत और साझा हितों की हिफाज़त करते हुए मिल जल कर कोशिशें करने और आपसी सहयोग को बढ़ाने की ज़रूरत है।